मराठा नौसेना एवं कान्होजी आंग्रे: कोंकण तट पर ब्रिटिश और पुर्तगाली बेड़ों के विरुद्ध अजेय नौसैनिक युद्ध
📜 ऐतिहासिक संक्षिप्त विवरण (Executive Snapshot)
📍 Heritage Atlas & Geographic Location
📜 Civilizational Milestoneभारतीय सैन्य इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज को 'भारतीय नौसेना का जनक' (Father of the Indian Navy) कहा जाता है। 17वीं शताब्दी में जब मुगलों से लेकर अधिकांश भारतीय शासक समुद्र और यूरोपीय शक्तियों (पुर्तगाली, अंग्रेज और डच) के नौसैनिक खतरे के प्रति उदासीन थे, तब शिवाजी महाराज ने प्रसिद्ध दूरदर्शी सूत्र दिया था:
"ज्यांचे आरमार, त्याचा समुद्र (जिसका नौसैनिक बेड़ा है, उसी का समुद्र है)।"
शिवाजी महाराज द्वारा 1659 में स्थापित मराठा नौसेना ने आगे चलकर महान मराठा नौसेनाध्यक्ष (एडमिरल) सरखेल कान्होजी आंग्रे (Sarkhel Kanhoji Angre - 1669–1729 ईस्वी) के नेतृत्व में 30 वर्षों तक अरब सागर और कोंकण तट पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी, पुर्तगालियों और जंजीरा के सिद्दियों के विशाल युद्धपोतों को धूल चटाई। कान्होजी आंग्रे अपने पूरे जीवनकाल में कभी किसी नौसैनिक युद्ध में पराजित नहीं हुए।
1. अपतटीय जल दुर्गों (Sea Forts) का सुरक्षा घेरा
मराठा नौसेना की शक्ति केवल जहाजों पर नहीं, बल्कि कोंकण तट पर समुद्र के भीतर पत्थरों के द्वीपों पर निर्मित अजेय जल दुर्गों पर टिकी थी:
मराठा नौसेना का त्रिस्तरीय तटीय रक्षा तंत्र
===========================================
[खुला अरब सागर - यूरोपीय जहाजों का आगमन]
│
▼
[जल दुर्गों की श्रृंखला - सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग, पद्मदुर्ग, सुवर्णदुर्ग, कुलाबा]
│ (तोपों का भारी क्रॉस-फायर)
▼
[छिछले पानी की खाड़ियां (Creeks & Shallow Estuaries)]
│ (भारी यूरोपीय जहाज यहां फंस जाते थे)
▼
[मराठा गुराब (Gurabs) और गालिबेट (Galibats) द्वारा तीव्र नौसैनिक हमला]
- सिंधुदुर्ग (मालवण): शिवाजी महाराज ने स्वयं 1664 में समुद्र के भीतर कुढ़ते द्वीप पर इसकी नींव रखी। इसकी दीवारों को समुद्र की प्रचंड लहरों से बचाने के लिए नींव में पिघला हुआ सीसा (Lead) भरा गया था।
- विजयदुर्ग (घेरिया): कान्होजी आंग्रे का मुख्य नौसैनिक मुख्यालय। इसके चारों ओर समुद्र के भीतर छिपी हुई पत्थरों की एक दीवार (Underwater Wall) बनाई गई थी, जिससे अनजान विदेशी जहाजों के पेंदे टकराकर चकनाचूर हो जाते थे।
2. मराठा जहाज: गुराब और गालिबेट
मराठा जहाजों की बनावट कोंकण की छिछली खाड़ियों और चट्टानी तटों के लिए अनुकूलित थी:
- गुराब (Gurab): भारी दो या तीन मस्तूल वाला युद्धपोत, जिस पर 16 से 20 भारी तोपें लगी होती थीं।
- गालिबेट (Galibat): हल्की, तेज रफ्तार नौका, जिसे 40 से 50 मल्लाहों द्वारा पतवारों (Oars) से चलाया जाता था। हवा न होने पर भी ये नौकाएं शांत पानी में तेजी से तैरती थीं और हवा पर निर्भर भारी ब्रिटिश जहाजों को चारों ओर से घेरकर तोपों से भून देती थीं।
3. ब्रिटिश-पुर्तगाली संयुक्त बेड़े की पराजय (1721 ईस्वी)
1721 में कान्होजी आंग्रे की शक्ति से आतंकित होकर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और पुर्तगाली गवर्नर ने मिलकर एक विशाल संयुक्त बेड़ा तैयार किया:
- ब्रिटिश और पुर्तगालियों के पास 30 से अधिक तोपों से लैस कई बड़े युद्धपोत और 6,000 सैनिक थे।
- उन्होंने आंग्रे के विजयदुर्ग (Vijaydurg) पर घेरा डाला।
- कान्होजी आंग्रे ने अपनी गुरिल्ला तटीय रणनीति से अंग्रेजों के तोपखाने को बेअसर कर दिया और पलटवार करते हुए उनके प्रमुख युद्धपोतों को जला दिया। ब्रिटिश और पुर्तगाली सेना भारी क्षति उठाकर भाग खड़ी हुई।
4. भारतीय नौसेना का वर्तमान सम्मान
- आईएनएस आंग्रे (INS Angre): मुंबई में भारतीय नौसेना की पश्चिमी नौसेना कमान (Western Naval Command) के मुख्यालय का नाम सरखेल कान्होजी आंग्रे के सम्मान में 'INS आंग्रे' रखा गया है।
- भारतीय नौसेना की नई सील (Naval Ensign): 2022 में भारतीय नौसेना के ध्वज से औपनिवेशिक सेंट जॉर्ज क्रॉस को हटाकर छत्रपति शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक अष्टकोणीय राजमुद्रा को स्थापित किया गया।
UPSC सिविल सेवा पाठ्यक्रम प्रासंगिकता (Syllabus Linkage)
यह विषय सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 (GS-1: भारतीय विरासत एवं संस्कृति, इतिहास) से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है। अभ्यर्थी ऊपर उद्धृत प्राथमिक शिलालेखों, स्थापत्य शैलियों (विमान/शिखर), एवं तत्कालीन प्रशासनिक-सैन्य मॉडलों का विशेष रूप से विश्लेषण करें।
पूर्ण UPSC GS-1 कला एवं संस्कृति पाठ्यक्रम अनुक्रमणिका देखें →भारतीय पुरातत्व, अभिलेखशास्त्र (Epigraphy) और सैन्य इतिहास के शोधार्थियों द्वारा संकलित। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) उत्खनन पत्रों, एपिग्राफिया इंडिका और प्राथमिक स्रोतों पर आधारित।
संबंधित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक शोध
चोल नौसेना: दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय सामुद्रिक साम्राज्य एवं श्रीविजय अभियान
1025 ईस्वी का महान नौसैनिक अभियान: राजेंद्र चोल प्रथम का बेड़ा, मलक्का जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, श्रीविजय साम्राज्य (सुमात्रा-मलेशिया) की पराजय और चीन तक फैले भारतीय व्यापारिक नेटवर्क का प्रामाणिक इतिहास।
लोथल का गोदीबाड़ा: प्राचीन सिंधु घाटी का 4,400 वर्ष पुराना हाइड्रोलिक नौसैनिक बंदरगाह
खंभात की खाड़ी के निकट 2400 ईसा पूर्व का ज्वारीय डॉकयार्ड: ज्वार-भाटे के जल को रोकने वाला लकड़ी का स्लुइस गेट, सिल्ट रोकने वाला चैंबर और मेसोपोटामियाई व्यापार का अंतरराष्ट्रीय समुद्री केंद्र।
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई: 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, नेतृत्व एवं अमर बलिदान
मणिकर्णिका से झांसी की वीरांगना महारानी तक: लॉर्ड डलहौजी का हड़प नीति (Doctrine of Lapse), झांसी दुर्ग का ऐतिहासिक घेरा, तात्या टोपे के साथ ग्वालियर का संग्राम और ह्यूरोज के सामने अमर शहादत का प्रामाणिक इतिहास।



