मराठा साम्राज्य: 'हिंदवी स्वराज्य', गनिमी कावा युद्धनीति, पेशवा काल एवं ऐतिहासिक विरासत
📜 ऐतिहासिक संक्षिप्त विवरण (Executive Snapshot)
📍 Heritage Atlas & Geographic Location
📜 Civilizational Milestone17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में दक्कन की सह्याद्रि पहाड़ियों में जन्म लेने वाला मराठा साम्राज्य मध्यकालीन भारत के इतिहास की सबसे निर्णायक शक्ति बनकर उभरा। युगप्रवर्तक महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज (1630–1680 ईस्वी) द्वारा स्थापित 'हिंदवी स्वराज्य' ने मुगल साम्राज्य की निरंकुश सत्ता और दक्कन की बीजापुर-गोलकुंडा सल्तनतों को जड़ से हिलाकर रख दिया।
18वीं शताब्दी में पेशवा बाजीराव प्रथम और पेशवा बालाजी बाजीराव के काल में मराठों ने अपनी सीमाओं का विस्तार करते हुए वर्तमान पाकिस्तान में अटक (सिंधु नदी) से लेकर ओडिशा में कटक तक और तमिलनाडु के तंजौर तक अपना भगवा ध्वज फहराया।
1. गनिमी कावा (Ganimi Kava): गुरिल्ला युद्धकला का विज्ञान
शिवाजी महाराज ने सह्याद्रि के बीहड़ भूगोल और घने जंगलों को अपनी सेना का सबसे बड़ा हथियार बनाया। उनकी युद्धनीति को गनिमी कावा (गनीम यानी शत्रु पर अचानक हमला) कहा जाता था:
गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध) की मुख्य कार्यप्रणाली
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1. गुप्तचर सूचना (बहिर्जी नाईक का खुफिया तंत्र)
2. शत्रु को संकरी घाटियों में खींचना
3. अचानक तीव्र हमला (Light Cavalry & Mavala Infantry)
4. रसद व आपूर्ति मार्ग काटना
5. भारी सेना के पहुंचने से पहले सह्याद्रि के अजेय किलों में सुरक्षित लौटना
- हल्के अश्वारोही (Bargirs & Silahdars): मराठा सैनिक भारी कवच के स्थान पर केवल तलवार, ढाल और भाला लेकर तेज रफ्तार दक्कनी घोड़ों पर चलते थे, जिससे वे 24 घंटे में 60 से 80 किलोमीटर की दूरी तय कर लेते थे।
- अचानक हमला और सुरक्षित वापसी: वे कभी भी खुले मैदान में मुगल तोपखाने के सामने नहीं लड़ते थे। शत्रु के थकने और रसद कटने पर वे टूट पड़ते और मुगलों के संभलने से पहले पहाड़ों में ओझल हो जाते।
2. अष्टप्रधान: शिवाजी महाराज का प्रशासनिक मंत्रिमंडल
शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा नहीं, बल्कि एक प्रबुद्ध प्रशासक थे। उन्होंने 1674 में रायगढ़ में अपने राज्याभिषेक के समय 8 मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय परिषद—अष्टप्रधान (Ashtapradhan)—गठित की:
| पद | उपाधि | मुख्य दायित्व |
|---|---|---|
| 1 | पेशवा (मुख्य प्रधान) | प्रधानमंत्री, संपूर्ण राज्य प्रशासन और राजा की अनुपस्थिति में नेतृत्व |
| 2 | अमात्य (मजूमदार) | वित्त मंत्री, राज्य की आय-व्यय और राजस्व का हिसाब |
| 3 | सचिव (सुरनवीस) | राजकीय पत्राचार और शाही आदेशों का प्रबंधन |
| 4 | मंत्री (वाकिया-नवीस) | गृह मंत्री एवं गुप्तचर विभाग की दैनिक रिपोर्टिंग |
| 5 | सेनापति (सर-ए-नौबत) | सेना का सर्वोच्च सेनाध्यक्ष एवं सैन्य भर्ती |
| 6 | सुमंत (दबीर) | विदेश मंत्री, पड़ोसी राज्यों से संधि व कूटनीतिक संबंध |
| 7 | न्यायाधीश | मुख्य न्यायाधीश, दीवानी और फौजदारी न्याय प्रणाली |
| 8 | पंडितराव | धार्मिक मामलों और दान-पुण्य के मुख्य अधिकारी |
3. राजस्व प्रणाली: चौथ और सरदेशमुखी
मराठा साम्राज्य की वित्तीय शक्ति दो प्रमुख करों पर आधारित थी:
- चौथ (Chauth): गैर-मराठा क्षेत्रों (जैसे मुगल या सल्तनत क्षेत्रों) से उनकी कुल उपज या राजस्व का 25% (एक-चौथाई) लिया जाता था, जिसके बदले मराठा सेना उस क्षेत्र को बाहरी आक्रमण से सुरक्षा देती थी और वहां लूटपाट न करने का वचन देती थी।
- सरदेशमुखी (Sardeshmukhi): चूंकि शिवाजी महाराज स्वयं को महाराष्ट्र के दक्कन का वंशानुगत प्रधान (सरदेशमुख) मानते थे, इसलिए वे कुल राजस्व पर अतिरिक्त 10% कानूनी उपकर (Cess) लेते थे।
4. दुर्ग निर्माण का विज्ञान
मराठा साम्राज्य की रीढ़ उसके 300 से अधिक अजेय किले (Forts) थे:
- जल दुर्ग (Sea Forts): सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग, सुवर्णदुर्ग (समुद्र में नौसैनिक अड्डों के रूप में)।
- गिरि दुर्ग (Hill Forts): रायगढ़ (राजधानी), राजगढ़, तोरणा, पन्हाला, प्रतापगढ़, सिंहगढ़।
5. UPSC मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण
- धार्मिक सहिष्णुता: शिवाजी महाराज की सेना और नौसेना में अनेक मुस्लिम सेनापति (जैसे सिद्दी हिलाल, दौलत खान, दरिया सारंग) थे। उन्होंने कुरान की प्रतियों और महिलाओं के सम्मान का सख्त आदेश दिया था।
- पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761): सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व में अहमद शाह अब्दाली के विरुद्ध मराठा सेना का महासंग्राम।
UPSC सिविल सेवा पाठ्यक्रम प्रासंगिकता (Syllabus Linkage)
यह विषय सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 (GS-1: भारतीय विरासत एवं संस्कृति, इतिहास) से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है। अभ्यर्थी ऊपर उद्धृत प्राथमिक शिलालेखों, स्थापत्य शैलियों (विमान/शिखर), एवं तत्कालीन प्रशासनिक-सैन्य मॉडलों का विशेष रूप से विश्लेषण करें।
पूर्ण UPSC GS-1 कला एवं संस्कृति पाठ्यक्रम अनुक्रमणिका देखें →भारतीय पुरातत्व, अभिलेखशास्त्र (Epigraphy) और सैन्य इतिहास के शोधार्थियों द्वारा संकलित। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) उत्खनन पत्रों, एपिग्राफिया इंडिका और प्राथमिक स्रोतों पर आधारित।
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